पद राजीव बरनि नहिं जाहीं
पद राजीव बरनि नहिं जाहीं
चौपाई १, दोहा १४८ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
पद राजीव बरनि नहिं जाहीं। मुनि मन मधुप बसहिं जेन्ह माहीं॥ बाम भाग सोभति अनुकूला। आदिसक्ति छबिनिधि जगमूला॥ १ ॥
अर्थ
जिनमें मुनियों के मनरूपी भौरे बसते हैं, भगवान् के उन चरणकमलों का तो वर्णन ही नहीं किया जा सकता। भगवान् के बायें भाग में सदा अनुकूल रहनेवाली, शोभा की राशि, जगत् की मूलकारणरूपा आदिशक्ति श्रीजानकीजी सुशोभित हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “मनु-शतरूपा तप एवं वरदान” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १४८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मनु-शतरूपा की कठोर तपस्या और भगवान द्वारा पुत्र रूप में प्रकट होने के वरदान का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
मनु-शतरूपा तप एवं वरदान