तप अधार सब सृष्टि भवानी

चौपाई ३, दोहा ७३ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

तप अधार सब सृष्टि भवानी। करहि जाइ तपु अस जियँ जानी॥ सुनत बचन बिसमित महतारी। सपन सुनायउ गिरिहि हँकारी॥ ३ ॥

अर्थ

हे भवानी! सारी सृष्टि तप के ही आधार पर है। ऐसा जी में जानकर तू जाकर तप कर। यह बात सुनकर माता को बड़ा अचरज हुआ और उसने हिमवान् को बुलाकर वह स्वप्न सुनाया।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “पार्वती का जन्म और तपस्या” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ७३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सती के पार्वती रूप में जन्म और शिव-प्राप्ति हेतु कठोर तपस्या का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
पार्वती का जन्म और तपस्या