तपबल रचइ प्रपंचु बिधाता

चौपाई २, दोहा ७३ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

तपबल रचइ प्रपंचु बिधाता। तपबल बिष्नु सकल जग त्राता॥ तपबल संभु करहिं संघारा। तपबल सेषु धरइ महिभारा॥ २ ॥

अर्थ

तप के बल से ही ब्रह्मा संसार को रचते हैं और तप के बल से ही विष्णु सारे जगत् का पालन करते हैं। तप के बल से ही शम्भु [रुद्ररूप से जगत् का] संहार करते हैं और तप के बल से ही शेषजी पृथ्वी का भार धारण करते हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “पार्वती का जन्म और तपस्या” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ७३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सती के पार्वती रूप में जन्म और शिव-प्राप्ति हेतु कठोर तपस्या का वर्णन है।

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पार्वती का जन्म और तपस्या