मातु पितहि बहुबिधि समुझाई

चौपाई ४, दोहा ७३ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

मातु पितहि बहुबिधि समुझाई। चलीं उमा तप हित हरषाई॥ प्रिय परिवार पिता अरु माता। भए बिकल मुख आव न बाता॥ ४ ॥

अर्थ

माता-पिता को बहुत तरह से समझाकर बड़े हर्ष के साथ पार्वतीजी तप करने के लिये चलीं। प्यारे परिवार, पिता और माता सब व्याकुल हो गये। किसी के मुँह से बात नहीं निकलती।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “पार्वती का जन्म और तपस्या” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ७३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सती के पार्वती रूप में जन्म और शिव-प्राप्ति हेतु कठोर तपस्या का वर्णन है।

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पार्वती का जन्म और तपस्या