तन सकोचु मन परम उछाहू
तन सकोचु मन परम उछाहू
चौपाई २, दोहा २६४ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
तन सकोचु मन परम उछाहू। गूढ़ प्रेमु लखि परइ न काहू॥ जाइ समीप राम छबि देखी। रहि जनु कुअँरि चित्र अवरेखी॥ २ ॥
अर्थ
सीताजी के शरीर में संकोच है, पर मन में परम उत्साह है। उनका यह गूढ़ प्रेम किसी को जान नहीं पड़ रहा है। समीप जाकर श्रीरामजी की छवि देखकर राजकुमारी चित्र में लिखी-सी रह गयीं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “जयमाल पहनाना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २६४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में धनुषभंग के बाद सीता द्वारा श्रीराम को जयमाल अर्पण और देवताओं की पुष्पवर्षा का वर्णन है।
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जयमाल पहनाना