चतुर सखीं लखि कहा बुझाई
चतुर सखीं लखि कहा बुझाई
चौपाई ३, दोहा २६४ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
चतुर सखीं लखि कहा बुझाई। पहिरावहु जयमाल सुहाई॥ सुनत जुगल कर माल उठाई। प्रेम बिबस पहिराइ न जाई॥ ३ ॥
अर्थ
चतुर सखी ने यह दशा देखकर समझाकर कहा—सुहावनी जयमाला पहनाओ। यह सुनकर सीताजी ने दोनों हाथों से माला उठायी, पर प्रेम के वश होने से पहनायी नहीं जाती।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “जयमाल पहनाना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २६४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में धनुषभंग के बाद सीता द्वारा श्रीराम को जयमाल अर्पण और देवताओं की पुष्पवर्षा का वर्णन है।
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जयमाल पहनाना