सखिन्ह मध्य सिय सोहति कैसें
सखिन्ह मध्य सिय सोहति कैसें
चौपाई १, दोहा २६४ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सखिन्ह मध्य सिय सोहति कैसें। छबिगन मध्य महाछबि जैसें॥ कर सरोज जयमाल सुहाई। बिस्व बिजय सोभा जेहिं छाई॥ १ ॥
अर्थ
सखियों के बीच में सीताजी कैसी शोभित हो रही हैं; जैसे बहुत-सी छबियों के बीच में महाछबि हो। करकमल में सुन्दर जयमाला है, जिसमें विश्वविजय की शोभा छायी हुई है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “जयमाल पहनाना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २६४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में धनुषभंग के बाद सीता द्वारा श्रीराम को जयमाल अर्पण और देवताओं की पुष्पवर्षा का वर्णन है।
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जयमाल पहनाना