तजिहउँ तुरत देह तेहि हेतू
तजिहउँ तुरत देह तेहि हेतू
चौपाई ४, दोहा ६४ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
तजिहउँ तुरत देह तेहि हेतू। उर धरि चंद्रमौलि बृषकेतू॥ अस कहि जोग अगिनि तनु जारा। भयउ सकल मख हाहाकारा॥ ४ ॥
अर्थ
इसलिए चन्द्रमौलि वृषकेतु शिवजी को हृदय में धारण करके मैं इस शरीर को तुरंत ही त्याग दूँगी। ऐसा कहकर सतीजी ने योगाग्नि में अपना शरीर भस्म कर डाला। सारी यज्ञशाला में हाहाकार मच गया।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “सती का देहत्याग, दक्ष यज्ञ विध्वंस” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ६४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सती का योगाग्नि में देहत्याग और वीरभद्र द्वारा दक्ष यज्ञ के विध्वंस का वर्णन है।
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सती का देहत्याग, दक्ष यज्ञ विध्वंस