जगदातमा महेसु पुरारी

चौपाई ३, दोहा ६४ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

जगदातमा महेसु पुरारी। जगत जनक सब के हितकारी॥ पिता मंदमति निंदत तेही। दच्छ सुक्र संभव यह देही॥ ३ ॥

अर्थ

त्रिपुर दैत्य को मारनेवाले भगवान् महेश्वर सम्पूर्ण जगत् के आत्मा हैं, वे जगत्पिता और सब का हित करनेवाले हैं। मेरा मंदबुद्धि पिता उनकी निंदा करता है; और मेरा यह शरीर दक्ष ही के वीर्य से उत्पन्न है।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “सती का देहत्याग, दक्ष यज्ञ विध्वंस” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ६४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सती का योगाग्नि में देहत्याग और वीरभद्र द्वारा दक्ष यज्ञ के विध्वंस का वर्णन है।

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सती का देहत्याग, दक्ष यज्ञ विध्वंस