तहँ करि भोग बिसाल तात गएँ

सोरठा १५१ · बालकाण्ड

सोरठा पाठ

तहँ करि भोग बिसाल तात गएँ कछु काल पुनि। होइहहु अवध भुआल तब मैं होब तुम्हार सुत॥ १५१ ॥

अर्थ

हे तात! वहाँ [स्वर्ग के] बहुत-से भोग भोगकर, कुछ काल बीत जाने पर, तुम अवध के राजा होगे। तब मैं तुम्हारा पुत्र होऊँगा।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “मनु-शतरूपा तप एवं वरदान” प्रकरण का सोरठा १५१ है। इस प्रकरण में मनु-शतरूपा की कठोर तपस्या और भगवान द्वारा पुत्र रूप में प्रकट होने के वरदान का वर्णन है।

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मनु-शतरूपा तप एवं वरदान