इच्छामय नरबेष सँवारें

चौपाई १, दोहा १५२ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

इच्छामय नरबेष सँवारें। होइहउँ प्रगट निकेत तुम्हारें॥ अंसन्ह सहित देह धरि ताता। करिहउँ चरित भगत सुखदाता॥ १ ॥

अर्थ

इच्छामय मनुष्यरूप सजकर मैं तुम्हारे घर प्रकट होऊँगा। हे तात! मैं अपने अंशों सहित देह धारण करके भक्तों को सुख देनेवाले चरित्र करूँगा।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “मनु-शतरूपा तप एवं वरदान” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १५२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मनु-शतरूपा की कठोर तपस्या और भगवान द्वारा पुत्र रूप में प्रकट होने के वरदान का वर्णन है।

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मनु-शतरूपा तप एवं वरदान