तब तब कथा मुनीसन्ह गाई

चौपाई २, दोहा १४० के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

तब तब कथा मुनीसन्ह गाई। परम पुनीत प्रबंध बनाई॥ बिबिध प्रसंग अनूप बखाने। करहिं न सुनि आचरजु सयाने॥ २ ॥

अर्थ

तब-तब मुनीश्वरों ने परम पवित्र काव्यरचना करके उनकी कथाओं का गान किया है और भाँति-भाँति के अनुपम प्रसंगों का वर्णन किया है, जिनको सुनकर समझदार (विवेकी) लोग आश्चर्य नहीं करते।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “नारद का शाप और मोहभंग” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १४० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में नारद का स्वयंवर में मोह, शाप और अंततः माया-भंग का वर्णन है।

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नारद का शाप और मोहभंग