एहि बिधि जनम करम हरि केरे
एहि बिधि जनम करम हरि केरे
चौपाई १, दोहा १४० के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
एहि बिधि जनम करम हरि केरे। सुंदर सुखद बिचित्र घनेरे॥ कलप कलप प्रति प्रभु अवतरहीं। चारु चरित नानाबिधि करहीं॥ १ ॥
अर्थ
इस प्रकार भगवान् के अनेकों सुन्दर, सुखदायक और अलौकिक जन्म और कर्म हैं। प्रत्येक कल्प में जब-जब भगवान् अवतार लेते हैं और नाना प्रकार की सुन्दर लीलाएँ करते हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “नारद का शाप और मोहभंग” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १४० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में नारद का स्वयंवर में मोह, शाप और अंततः माया-भंग का वर्णन है।
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नारद का शाप और मोहभंग