तब प्रभु रिषिन्ह समेत नहाए

चौपाई २, दोहा २१२ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

तब प्रभु रिषिन्ह समेत नहाए। बिबिध दान महिदेवन्हि पाए॥ हरषि चले मुनि बृंद सहाया। बेगि बिदेह नगर निअराया॥ २ ॥

अर्थ

तब प्रभु ने ऋषियों सहित [गंगाजी में] स्नान किया। ब्राह्मणों ने भाँति-भाँति के दान पाए। फिर मुनिवृन्द के साथ वे प्रसन्न होकर चले और शीघ्र ही जनकपुर के निकट पहुँच गये।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “विश्वामित्र का जनकपुर में प्रवेश” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २१२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विश्वामित्र, श्रीराम और लक्ष्मण के जनकपुर आगमन और मिथिला की अनुपम शोभा का वर्णन है।

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विश्वामित्र का जनकपुर में प्रवेश