पुर रम्यता राम जब देखी
पुर रम्यता राम जब देखी
चौपाई ३, दोहा २१२ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
पुर रम्यता राम जब देखी। हरषे अनुज समेत बिसेषी॥ बापीं कूप सरित सर नाना। सलिल सुधासम मनि सोपाना॥ ३ ॥
अर्थ
श्रीरामजी ने जब जनकपुर की शोभा देखी, तब वे छोटे भाई लक्ष्मण सहित अत्यन्त हर्षित हुए। वहाँ अनेक बावलियाँ, कुएँ, नदी और तालाब हैं, जिनमें अमृत के समान जल है और मणियों की सीढ़ियाँ [बनी हुई] हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “विश्वामित्र का जनकपुर में प्रवेश” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २१२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विश्वामित्र, श्रीराम और लक्ष्मण के जनकपुर आगमन और मिथिला की अनुपम शोभा का वर्णन है।
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विश्वामित्र का जनकपुर में प्रवेश