तब नारद हरि पद सिर नाई

चौपाई ४, दोहा १२९ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

तब नारद हरि पद सिर नाई। चले हृदयँ अहमिति अधिकाई॥ श्रीपति निज माया तब प्रेरी। सुनहु कठिन करनी तेहि केरी॥ ४ ॥

अर्थ

तब नारदजी भगवान् के चरणों में सिर नवाकर चले। उनके हृदय में अभिमान और भी बढ़ गया। तब लक्ष्मीपति भगवान् ने अपनी माया को प्रेरित किया। अब उसकी कठिन करनी सुनो।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “नारद का अभिमान और माया” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १२९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में नारद का कामजय के बाद अभिमान और भगवान की माया का प्रभाव का वर्णन है।

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नारद का अभिमान और माया