बेगि सो मैं डारिहउँ उखारी
बेगि सो मैं डारिहउँ उखारी
चौपाई ३, दोहा १२९ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
बेगि सो मैं डारिहउँ उखारी। पन हमार सेवक हितकारी॥ मुनि कर हित मम कौतुक होई। अवसि उपाय करबि मैं सोई॥ ३ ॥
अर्थ
मैं उसे तुरंत ही उखाड़ दूँगा, क्योंकि सेवकों का हित करना हमारा प्रण है। मैं अवश्य ही वह उपाय करूँगा जिससे मुनि का कल्याण और मेरा खेल हो।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “नारद का अभिमान और माया” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १२९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में नारद का कामजय के बाद अभिमान और भगवान की माया का प्रभाव का वर्णन है।
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नारद का अभिमान और माया