बिरचेउ मग महुँ नगर तेहिं सत

दोहा १२९ · बालकाण्ड

दोहा पाठ

बिरचेउ मग महुँ नगर तेहिं सत जोजन बिस्तार। श्रीनिवासपुर तें अधिक रचना बिबिध प्रकार॥ १२९ ॥

अर्थ

उस (हरिमाया) ने रास्ते में सौ योजन का एक नगर रचा। उस नगर की भाँति-भाँतिकी रचनाएँ लक्ष्मीनिवास भगवान् विष्णु के नगर (वैकुण्ठ) से भी अधिक सुन्दर थीं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “नारद का शाप और मोहभंग” प्रकरण का दोहा १२९ है। इस प्रकरण में नारद का स्वयंवर में मोह, शाप और अंततः माया-भंग का वर्णन है।

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नारद का शाप और मोहभंग