तब नारद गवने सिव पाहीं
तब नारद गवने सिव पाहीं
चौपाई ३, दोहा १२७ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
तब नारद गवने सिव पाहीं। जिता काम अहमिति मन माहीं॥ मार चरित संकरहि सुनाए। अतिप्रिय जानि महेस सिखाए॥ ३ ॥
अर्थ
तब नारदजी शिवजी के पास गये। उनके मन में इस बात का अहंकार हो गया कि हमने कामदेव को जीत लिया। उन्होंने कामदेव के चरित्र शिवजी को सुनाये और महादेवजी ने उन (नारदजी) को अत्यन्त प्रिय जानकर [इस प्रकार] शिक्षा दी--।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “नारद का अभिमान और माया” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १२७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में नारद का कामजय के बाद अभिमान और भगवान की माया का प्रभाव का वर्णन है।
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नारद का अभिमान और माया