तब मयना हिमवंतु अनंदे

चौपाई १, दोहा ९९ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

तब मयना हिमवंतु अनंदे। पुनि पुनि पारबती पद बंदे॥ नारि पुरुष सिसु जुबा सयाने। नगर लोग सब अति हरषाने॥ १ ॥

अर्थ

तब मैना और हिमवान् आनन्द में मग्न हो गये और उन्होंने बार-बार पार्वती के चरणों की वन्दना की। स्त्री, पुरुष, बालक, युवा और सयाने, नगर के सभी लोग बहुत हर्षित हुए।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “शिवजी की विचित्र बारात” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ९९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिवजी की विचित्र बारात और हिमवान के घर विवाह की मंगल तैयारी का वर्णन है।

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शिवजी की विचित्र बारात