लगे होन पुर मंगल गाना

चौपाई २, दोहा ९९ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

लगे होन पुर मंगल गाना। सजे सबहिं हाटक घट नाना॥ भाँति अनेक भई जेवनारा। सूपसास्त्र जस कछु ब्यवहारा॥ २ ॥

अर्थ

नगर में मंगलगीत गाये जाने लगे और सबने भाँति-भाँति के हाटक के कलश सजाये। भाँति अनेक भई जेवनारा। सूपसास्त्र जस कछु ब्यवहारा॥

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “शिवजी की विचित्र बारात” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ९९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिवजी की विचित्र बारात और हिमवान के घर विवाह की मंगल तैयारी का वर्णन है।

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शिवजी की विचित्र बारात