तब कर अस बिमोह अब नाहीं
तब कर अस बिमोह अब नाहीं
चौपाई ४, दोहा १०९ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
तब कर अस बिमोह अब नाहीं। रामकथा पर रुचि मन माहीं॥ कहहु पुनीत राम गुन गाथा। भुजगराज भूषन सुरनाथा॥ ४ ॥
अर्थ
मुझे अब पहले-जैसा मोह नहीं है, अब तो मेरे मन में रामकथा सुनने की रुचि है। हे शेषनाग को अलंकार रूप में धारण करने वाले देवताओं के नाथ! आप श्रीरामचन्द्रजी के गुणों की पवित्र कथा कहिये।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “शिव-पार्वती संवाद” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १०९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद पार्वती द्वारा राम के स्वरूप और अवतार-रहस्य के विषय में शिवजी से प्रेमपूर्ण संवाद का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
शिव-पार्वती संवाद