बंदउँ पद धरि धरनि सिरु बिनय

दोहा १०९ · बालकाण्ड

दोहा पाठ

बंदउँ पद धरि धरनि सिरु बिनय करउँ कर जोरि। बरनहु रघुबर बिसद जसु श्रुति सिद्धांत निचोरि॥ १०९ ॥

अर्थ

मैं पृथ्वी पर सिर टेककर आपके चरणों की वन्दना करती हूँ और हाथ जोड़कर विनती करती हूँ। आप वेदों के सिद्धांत को निचोड़कर श्रीरघुनाथजी का निर्मल यश वर्णन कीजिये।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “शिव-पार्वती संवाद” प्रकरण का दोहा १०९ है। इस प्रकरण में विवाह के बाद पार्वती द्वारा राम के स्वरूप और अवतार-रहस्य के विषय में शिवजी से प्रेमपूर्ण संवाद का वर्णन है।

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शिव-पार्वती संवाद