तब जनमेउ षटबदन कुमारा
तब जनमेउ षटबदन कुमारा
चौपाई ४, दोहा १०३ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
तब जनमेउ षटबदन कुमारा। तारकु असुरु समर जेहिं मारा॥ आगम निगम प्रसिद्ध पुराना। षन्मुख जन्मु सकल जग जाना॥ ४ ॥
अर्थ
तब छः मुख वाले कुमार (स्वामिकार्तिक) का जन्म हुआ, जिन्होंने युद्ध में तारकासुर को मारा। वेद, शास्त्र और पुराणों में स्वामिकार्तिक के जन्म की कथा प्रसिद्ध है और सारा जगत् उसे जानता है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “शिवजी का विवाह” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १०३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती के दिव्य विवाह और समस्त लोकों में उत्सव का वर्णन है।
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शिवजी का विवाह