करहिं बिबिध बिधि भोग बिलासा
करहिं बिबिध बिधि भोग बिलासा
चौपाई ३, दोहा १०३ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
करहिं बिबिध बिधि भोग बिलासा। गनन्ह समेत बसहिं कैलासा॥ हर गिरिजा बिहार नित नयऊ। एहि बिधि बिपुल काल चलि गयऊ॥ ३ ॥
अर्थ
शिव-पार्वती विविध प्रकार के भोग-विलास करते हुए अपने गणों सहित कैलास पर रहने लगे। वे नित्य नये विहार करते थे। इस प्रकार बहुत समय बीत गया।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “शिवजी का विवाह” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १०३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती के दिव्य विवाह और समस्त लोकों में उत्सव का वर्णन है।
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शिवजी का विवाह