तब अदृस्य भए पावक सकल सभहि

दोहा १८९ · बालकाण्ड

दोहा पाठ

तब अदृस्य भए पावक सकल सभहि समुझाइ। परमानंद मगन नृप हरष न हृदयँ समाइ॥ १८९ ॥

अर्थ

तदनन्तर अग्निदेव सारी सभा को समझाकर अन्तर्धान हो गये। राजा परमानन्द में मग्न हो गये, उनके हृदय में हर्ष समाता न था।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “दशरथ का पुत्रेष्टि यज्ञ” प्रकरण का दोहा १८९ है। इस प्रकरण में राजा दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ और रानियों के गर्भवती होने का वर्णन है।

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दशरथ का पुत्रेष्टि यज्ञ