जो बसिष्ठ कछु हृदयँ बिचारा
जो बसिष्ठ कछु हृदयँ बिचारा
चौपाई ४, दोहा १८९ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
जो बसिष्ठ कछु हृदयँ बिचारा। सकल काजु भा सिद्ध तुम्हारा॥ यह हबि बाँटि देहु नृप जाई। जथा जोग जेहि भाग बनाई॥ ४ ॥
अर्थ
[और दशरथ से बोले--] वसिष्ठ ने हृदय में जो कुछ विचारा था, तुम्हारा वह सब काम सिद्ध हो गया। हे राजन्! [अब] तुम जाकर इस हविष्यान्न (पायस) को, जैसा उचित हो, वैसे भाग बनाकर बाँट दो।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “दशरथ का पुत्रेष्टि यज्ञ” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १८९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ और रानियों के गर्भवती होने का वर्णन है।
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दशरथ का पुत्रेष्टि यज्ञ