स्यामल गौर धरें धनु भाथा
स्यामल गौर धरें धनु भाथा
चौपाई ३, दोहा २९१ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
स्यामल गौर धरें धनु भाथा। बय किसोर कौसिक मुनि साथा॥ पहिचानहु तुम्ह कहहु सुभाऊ। प्रेम बिबस पुनि पुनि कह राऊ॥ ३ ॥
अर्थ
साँवले और गोरे शरीरवाले वे धनुष और तरकस धारण किये रहते हैं, किशोर अवस्था है, कौसिक मुनि के साथ हैं। तुम उनको पहचानते हो तो उनका स्वभाव बताओ। राजा प्रेम के वश होने से बार-बार यह कह रहे हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “जनक का दूत, बारात का प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २९१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में जनक के दूत के संदेश पर दशरथजी की बारात का जनकपुर के लिए हर्षपूर्ण प्रस्थान का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
जनक का दूत, बारात का प्रस्थान