तब नृप दूत निकट बैठारे

चौपाई २, दोहा २९१ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

तब नृप दूत निकट बैठारे। मधुर मनोहर बचन उचारे॥ भैआ कहहु कुसल दोउ बारे। तुम्ह नीकें निज नयन निहारे॥ २ ॥

अर्थ

तब नृप ने दूतों को निकट बैठाया। मधुर और मनोहर वचन उचारे। भैया! कहो, दोनों बच्चे कुशल से तो हैं? तुमने नीकें निज नयन निहारे।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “जनक का दूत, बारात का प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २९१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में जनक के दूत के संदेश पर दशरथजी की बारात का जनकपुर के लिए हर्षपूर्ण प्रस्थान का वर्णन है।

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जनक का दूत, बारात का प्रस्थान