जा दिन तें मुनि गए लवाई

चौपाई ४, दोहा २९१ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

जा दिन तें मुनि गए लवाई। तब तें आजु साँचि सुधि पाई॥ कहहु बिदेह कवन बिधि जाने। सुनि प्रिय बचन दूत मुसुकाने॥ ४ ॥

अर्थ

[भैया!] जिस दिन से मुनि उन्हें लिवा ले गये, तब से आज ही हमने सच्ची खबर पायी है। कहो तो महाराज जनक ने उन्हें कैसे पहचाना? ये प्रिय वचन सुनकर दूत मुसकराये।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “जनक का दूत, बारात का प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २९१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में जनक के दूत के संदेश पर दशरथजी की बारात का जनकपुर के लिए हर्षपूर्ण प्रस्थान का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
जनक का दूत, बारात का प्रस्थान