स्याम गौर सुंदर दोउ भाई
स्याम गौर सुंदर दोउ भाई
चौपाई २, दोहा २०९ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
स्याम गौर सुंदर दोउ भाई। बिस्वामित्र महानिधि पाई॥ प्रभु ब्रह्मन्यदेव मैं जाना। मोहि निति पिता तजेउ भगवाना॥ २ ॥
अर्थ
श्याम और गौर वर्ण के दोनों भाई परम सुन्दर हैं। विश्वामित्रजी को महान् निधि प्राप्त हो गयी। [वे सोचने लगे—] मैं जान गया कि प्रभु ब्रह्मण्यदेव (ब्राह्मणों के भक्त) हैं। मेरे लिये भगवान् ने अपने पिताको भी छोड़ दिया।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “विश्वामित्र का राम-लक्ष्मण माँगना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २०९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विश्वामित्र द्वारा यज्ञ-रक्षा हेतु राम-लक्ष्मण को माँगने और दशरथ द्वारा वशिष्ठ की सम्मति से उन्हें भेजने का वर्णन है।
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विश्वामित्र का राम-लक्ष्मण माँगना