चले जात मुनि दीन्हि देखाई
चले जात मुनि दीन्हि देखाई
चौपाई ३, दोहा २०९ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
चले जात मुनि दीन्हि देखाई। सुनि ताड़का क्रोध करि धाई॥ एकहिं बान प्रान हरि लीन्हा। दीन जानि तेहि निज पद दीन्हा॥ ३ ॥
अर्थ
मार्ग में चले जाते हुए मुनि ने ताड़का को दिखलाया। सुनते ही वह क्रोध करके दौड़ी। श्रीरामजी ने एक ही बाण से उसके प्राण हर लिये और दीन जानकर उसको निजपद (अपना दिव्य स्वरूप) दिया।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “विश्वामित्र का राम-लक्ष्मण माँगना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २०९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विश्वामित्र द्वारा यज्ञ-रक्षा हेतु राम-लक्ष्मण को माँगने और दशरथ द्वारा वशिष्ठ की सम्मति से उन्हें भेजने का वर्णन है।
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विश्वामित्र का राम-लक्ष्मण माँगना