अरुन नयन उर बाहु बिसाला
अरुन नयन उर बाहु बिसाला
चौपाई १, दोहा २०९ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
अरुन नयन उर बाहु बिसाला। नील जलज तनु स्याम तमाला॥ कटि पट पीत कसें बर भाथा। रुचिर चाप सायक दुहुँ हाथा॥ १ ॥
अर्थ
भगवान् के लाल नेत्र हैं, चौड़ी छाती और विशाल भुजाएँ हैं, नील कमल और तमाल के वृक्ष की तरह श्याम शरीर है, कमर में पीत वस्त्र [पहने] और सुन्दर तरकस कसे हुए हैं। दोनों हाथों में [क्रमशः] सुन्दर धनुष और बाण हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “विश्वामित्र का राम-लक्ष्मण माँगना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २०९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विश्वामित्र द्वारा यज्ञ-रक्षा हेतु राम-लक्ष्मण को माँगने और दशरथ द्वारा वशिष्ठ की सम्मति से उन्हें भेजने का वर्णन है।
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विश्वामित्र का राम-लक्ष्मण माँगना