स्याम गौर मृदु बयस किसोरा

चौपाई ३, दोहा २१५ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

स्याम गौर मृदु बयस किसोरा। लोचन सुखद बिस्व चित चोरा॥ उठे सकल जब रघुपति आए। बिस्वामित्र निकट बैठाए॥ ३ ॥

अर्थ

सुकुमार किशोर अवस्थावाले, श्याम और गौर वर्ण के दोनों कुमार नेत्रों को सुख देने वाले और सारे विश्व के चित्त को चुराने वाले हैं। जब रघुनाथजी आये तब सभी [उनके रूप एवं तेज से प्रभावित होकर] उठकर खड़े हो गये। विश्वामित्रजी ने उनको अपने पास बैठा लिया।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “राम-लक्ष्मण को देख जनक मुग्ध” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २१५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम-लक्ष्मण के मनोहर रूप को देख जनकजी की प्रेममुग्धता और ब्रह्मसुख-विस्मृति का वर्णन है।

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राम-लक्ष्मण को देख जनक मुग्ध