भए सब सुखी देखि दोउ भ्राता
भए सब सुखी देखि दोउ भ्राता
चौपाई ४, दोहा २१५ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
भए सब सुखी देखि दोउ भ्राता। बारि बिलोचन पुलकित गाता॥ मूरति मधुर मनोहर देखी। भयउ बिदेहु बिदेहु बिसेषी॥ ४ ॥
अर्थ
दोनों भाइयों को देखकर सभी सुखी हुए। सबके नेत्रों में जल भर आया (आनन्द और प्रेम के आँसू उमड़ पड़े) और शरीर रोमांचित हो उठे। रामजी की मधुर मनोहर मूर्ति को देखकर विदेह (जनक) विशेष रूप से विदेह (देह की सुध-बुध से रहित) हो गये।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “राम-लक्ष्मण को देख जनक मुग्ध” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २१५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम-लक्ष्मण के मनोहर रूप को देख जनकजी की प्रेममुग्धता और ब्रह्मसुख-विस्मृति का वर्णन है।
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राम-लक्ष्मण को देख जनक मुग्ध