कुसल प्रस्न कहि बारहिं बारा
कुसल प्रस्न कहि बारहिं बारा
चौपाई २, दोहा २१५ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
कुसल प्रस्न कहि बारहिं बारा। बिस्वामित्र नृपहि बैठारा॥ तेहि अवसर आए दोउ भाई। गए रहे देखन फुलवाई॥ २ ॥
अर्थ
बार-बार कुशल प्रश्न करके विश्वामित्रजी ने राजा को बैठाया। उसी समय दोनों भाई आ पहुँचे, जो फुलवाड़ी देखने गये थे।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “राम-लक्ष्मण को देख जनक मुग्ध” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २१५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम-लक्ष्मण के मनोहर रूप को देख जनकजी की प्रेममुग्धता और ब्रह्मसुख-विस्मृति का वर्णन है।
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राम-लक्ष्मण को देख जनक मुग्ध