सुतन्ह समेत नहाइ नृप बोलि बिप्र
सुतन्ह समेत नहाइ नृप बोलि बिप्र
दोहा ३५४ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
सुतन्ह समेत नहाइ नृप बोलि बिप्र गुर ग्याति। भोजन कीन्ह अनेक बिधि घरी पंच गइ राति॥ ३५४ ॥
अर्थ
पुत्रों सहित स्नान करके राजा ने ब्राह्मण, गुरु और कुटुम्बियों को बुलाकर अनेक प्रकार के भोजन किये। [यह सब करते-करते] पाँच घड़ी रात बीत गयी।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का दोहा ३५४ है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।
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बारात का अयोध्या लौटना