जनक राज गुन सीलु बड़ाई
जनक राज गुन सीलु बड़ाई
चौपाई ४, दोहा ३५४ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
जनक राज गुन सीलु बड़ाई। प्रीति रीति संपदा सुहाई॥ बहुबिधि भूप भाट जिमि बरनी। रानी सब प्रमुदित सुनि करनी॥ ४ ॥
अर्थ
राजा जनक के गुण, शील, बड़ाई, प्रीति-रीति और सुहावनी सम्पत्ति का वर्णन राजा ने भाट की तरह बहुत प्रकार से किया। जनकजी की करनी सुनकर सब रानियाँ बहुत प्रसन्न हुईं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३५४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।
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बारात का अयोध्या लौटना