सूर सचिव सेनप बहुतेरे
सूर सचिव सेनप बहुतेरे
चौपाई २, दोहा २१४ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सूर सचिव सेनप बहुतेरे। नृपगृह सरिस सदन सब केरे॥ पुर बाहेर सर सरित समीपा। उतरे जहँ तहँ बिपुल महीपा॥ २ ॥
अर्थ
बहुत-से शूरवीर, मन्त्री और सेनापति हैं। उन सबके घर भी राजमहल-सरीखे ही हैं। नगर के बाहर तालाब और नदी के निकट जहाँ-तहाँ बहुत-से राजालोग उतरे हुए (डेरा डाले हुए) हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “विश्वामित्र का जनकपुर में प्रवेश” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २१४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विश्वामित्र, श्रीराम और लक्ष्मण के जनकपुर आगमन और मिथिला की अनुपम शोभा का वर्णन है।
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विश्वामित्र का जनकपुर में प्रवेश