सुभग द्वार सब कुलिस कपाटा

चौपाई १, दोहा २१४ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

सुभग द्वार सब कुलिस कपाटा। भूप भीर नट मागध भाटा॥ बनी बिसाल बाजि गज साला। हय गय रथ संकुल सब काला॥ १ ॥

अर्थ

राजमहल के सब दरवाजे (फाटक) सुन्दर हैं, जिनमें वज्र के (मजबूत अथवा हीरों के चमकते हुए) किवाड़ लगे हैं। वहाँ [मातहत] राजाओं, नटों, मागधों और भाटों की भीड़ लगी रहती है। घोड़ों और हाथियों के लिये बहुत बड़ी-बड़ी घुड़शालाएँ और गजशालाएँ (फीलखाने) बनी हुई हैं; जो सब समय घोड़े, हाथी और रथों से भरी रहती हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “विश्वामित्र का जनकपुर में प्रवेश” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २१४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विश्वामित्र, श्रीराम और लक्ष्मण के जनकपुर आगमन और मिथिला की अनुपम शोभा का वर्णन है।

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विश्वामित्र का जनकपुर में प्रवेश