देखि अनूप एक अँवराई

चौपाई ३, दोहा २१४ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

देखि अनूप एक अँवराई। सब सुपास सब भाँति सुहाई॥ कौसिक कहेउ मोर मनु माना। इहाँ रहिअ रघुबीर सुजाना॥ ३ ॥

अर्थ

[वहीं] आमों का एक अनुपम बाग देखकर, जहाँ सब प्रकार के सुभीते थे और जो सब तरह से सुहावना था, विश्वामित्रजी ने कहा— हे सुजान रघुवीर! मेरा मन कहता है कि यहीं रहा जाय।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “विश्वामित्र का जनकपुर में प्रवेश” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २१४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विश्वामित्र, श्रीराम और लक्ष्मण के जनकपुर आगमन और मिथिला की अनुपम शोभा का वर्णन है।

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विश्वामित्र का जनकपुर में प्रवेश