सुनु सेवक सुरतरु सुरधेनू
सुनु सेवक सुरतरु सुरधेनू
चौपाई १, दोहा १४६ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सुनु सेवक सुरतरु सुरधेनू। बिधि हरि हर बंदित पद रेनू॥ सेवत सुलभ सकल सुखदायक। प्रनतपाल सचराचर नायक॥ १ ॥
अर्थ
हे प्रभो! सुनिये, आप सेवकों के लिये कल्पवृक्ष और कामधेनु हैं। आपकी चरण-रज की ब्रह्मा, विष्णु और शिवजी भी वन्दना करते हैं। आप सेवा करने में सुलभ हैं तथा सब सुखों के देनेवाले हैं। आप शरणागत के रक्षक और जड-चेतन के स्वामी हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “मनु-शतरूपा तप एवं वरदान” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १४६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मनु-शतरूपा की कठोर तपस्या और भगवान द्वारा पुत्र रूप में प्रकट होने के वरदान का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
मनु-शतरूपा तप एवं वरदान