जौं अनाथ हित हम पर नेहू
जौं अनाथ हित हम पर नेहू
चौपाई २, दोहा १४६ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
जौं अनाथ हित हम पर नेहू। तौ प्रसन्न होइ यह बर देहू॥ जो सरूप बस सिव मन माहीं। जेहिं कारन मुनि जतन कराहीं॥ २ ॥
अर्थ
हे अनाथों के हितकारी! यदि हम पर आपका स्नेह है, तो प्रसन्न होकर यह वर दीजिये कि जो स्वरूप शिवजी के मन में बसता है और जिसके लिए मुनि यत्न करते हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “मनु-शतरूपा तप एवं वरदान” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १४६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मनु-शतरूपा की कठोर तपस्या और भगवान द्वारा पुत्र रूप में प्रकट होने के वरदान का वर्णन है।
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मनु-शतरूपा तप एवं वरदान