श्रवन सुधा सम बचन सुनि पुलक
श्रवन सुधा सम बचन सुनि पुलक
दोहा १४५ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
श्रवन सुधा सम बचन सुनि पुलक प्रफुल्लित गात। बोले मनु करि दंडवत प्रेम न हृदयँ समात॥ १४५ ॥
अर्थ
कानों में अमृत के समान लगनेवाले वचन सुनकर उनका शरीर पुलकित और प्रफुल्लित हो गया। तब मनुजी दण्डवत् करके बोले—प्रेम हृदय में समाता न था।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “मनु-शतरूपा तप एवं वरदान” प्रकरण का दोहा १४५ है। इस प्रकरण में मनु-शतरूपा की कठोर तपस्या और भगवान द्वारा पुत्र रूप में प्रकट होने के वरदान का वर्णन है।
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मनु-शतरूपा तप एवं वरदान