सुनि प्रभु बचन जोरि जुग पानी

चौपाई १, दोहा १४९ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

सुनि प्रभु बचन जोरि जुग पानी। धरि धीरजु बोली मृदु बानी॥ नाथ देखि पद कमल तुम्हारे। अब पूरे सब काम हमारे॥ १ ॥

अर्थ

प्रभु के वचन सुनकर, दोनों हाथ जोड़कर और धीरज धरकर मनुजी ने कोमल वाणी कही—हे नाथ! आपके चरणकमलों को देखकर अब हमारी सारी मनःकामनाएँ पूरी हो गयीं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “मनु-शतरूपा तप एवं वरदान” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १४९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मनु-शतरूपा की कठोर तपस्या और भगवान द्वारा पुत्र रूप में प्रकट होने के वरदान का वर्णन है।

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मनु-शतरूपा तप एवं वरदान