बोले कृपानिधान पुनि अति प्रसन्न मोहि
बोले कृपानिधान पुनि अति प्रसन्न मोहि
दोहा १४८ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
बोले कृपानिधान पुनि अति प्रसन्न मोहि जानि। मागहु बर जोइ भाव मन महादानि अनुमानि॥ १४८ ॥
अर्थ
फिर कृपानिधान भगवान् बोले—मुझे अत्यन्त प्रसन्न जानकर और बड़ा भारी दानी मानकर, जो मन को भाये वही वर माँग लो।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “मनु-शतरूपा तप एवं वरदान” प्रकरण का दोहा १४८ है। इस प्रकरण में मनु-शतरूपा की कठोर तपस्या और भगवान द्वारा पुत्र रूप में प्रकट होने के वरदान का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
मनु-शतरूपा तप एवं वरदान