सुनि पति बचन हरषि मन माहीं
सुनि पति बचन हरषि मन माहीं
चौपाई ३, दोहा ७२ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सुनि पति बचन हरषि मन माहीं। गई तुरत उठि गिरिजा पाहीं॥ उमहि बिलोकि नयन भरे बारी। सहित सनेह गोद बैठारी॥ ३ ॥
अर्थ
पति के वचन सुन मन में प्रसन्न होकर मैना उठकर तुरंत पार्वती के पास गयीं। पार्वती को देखकर उनकी आँखों में आँसू भर आये। उसे स्नेह के साथ गोद में बैठा लिया।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “पार्वती का जन्म और तपस्या” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ७२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सती के पार्वती रूप में जन्म और शिव-प्राप्ति हेतु कठोर तपस्या का वर्णन है।
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पार्वती का जन्म और तपस्या