नारद बचन सगर्भ सहेतू
नारद बचन सगर्भ सहेतू
चौपाई २, दोहा ७२ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
नारद बचन सगर्भ सहेतू। सुंदर सब गुन निधि बृषकेतू॥ अस बिचारि तुम्ह तजहु असंका। सबहि भाँति संकरु अकलंका॥ २ ॥
अर्थ
नारदजी के वचन रहस्य से युक्त और सकारण हैं और शिवजी समस्त सुन्दर गुणों के भण्डार हैं। यह विचारकर तुम [मिथ्या] सन्देह को छोड़ दो। शिवजी सभी तरह से निष्कलंक हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “पार्वती का जन्म और तपस्या” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ७२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सती के पार्वती रूप में जन्म और शिव-प्राप्ति हेतु कठोर तपस्या का वर्णन है।
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पार्वती का जन्म और तपस्या