सुनि मुनि गिरा सत्य जियँ जानी

चौपाई १, दोहा ६८ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

सुनि मुनि गिरा सत्य जियँ जानी। दुख दंपतिहि उमा हरषानी॥ नारदहूँ यह भेदु न जाना। दसा एक समुझब बिलगाना॥ १ ॥

अर्थ

नारद मुनि की वाणी सुनकर और उसको हृदय में सत्य जानकर पति-पत्नी (हिमवान् और मैना) को दुःख हुआ और पार्वतीजी प्रसन्न हुईं। नारदजी ने भी इस रहस्य को नहीं जाना, क्योंकि सब की बाहरी दशा एक-सी होने पर भी भीतरी समझ भिन्न-भिन्न थी।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “पार्वती का जन्म और तपस्या” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ६८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सती के पार्वती रूप में जन्म और शिव-प्राप्ति हेतु कठोर तपस्या का वर्णन है।

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पार्वती का जन्म और तपस्या