सकल सखीं गिरिजा गिरि मैना
सकल सखीं गिरिजा गिरि मैना
चौपाई २, दोहा ६८ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सकल सखीं गिरिजा गिरि मैना। पुलक सरीर भरे जल नैना॥ होइ न मृषा देवरिषि भाषा। उमा सो बचनु हृदयँ धरि राखा॥ २ ॥
अर्थ
सारी सखियाँ, पार्वती, पर्वतराज हिमवान् और मैना सभी के शरीर पुलकित थे और सभी के नेत्रों में जल भरा था। देवर्षि के वचन असत्य नहीं हो सकते, [यह विचारकर] पार्वती ने उन वचनों को हृदय में धारण कर लिया।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “पार्वती का जन्म और तपस्या” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ६८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सती के पार्वती रूप में जन्म और शिव-प्राप्ति हेतु कठोर तपस्या का वर्णन है।
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पार्वती का जन्म और तपस्या